¤ समाजवादी समाज की ओर ¤
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जागृति की लहर चलेगी, वर्ग लड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा अजब जड़ाई होगी॥
बने बनाये कानून लूट के, हमको यह स्वीकार नहीँ।
पूँजी के ढंग ढली हुयी, यह जनता की सरकार नहीँ॥
यहाँ खून पसीने की करेँ दलाली, चलना यह बाजार नहीँ।
गुर संगठन का सीख गये, अब मेहनतकस लाचार नहीँ॥
एक एक हक पर अड़ ज्यांगे, अब घणी कड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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समाज व्यवस्था कैसी होगी, आओ आज सुनायेँ।
दो वर्गोँ मेँ दुनिया बंट रही, वर्ग भेद समझायेँ॥
मेहनतकस की राजसत्ता ला पूँजीवाद हटायेँ।
लूट नाम न रहे जगत मेँ, नक्शा नया बनायेँ॥
हर काम सम्भालेँगे मिलजुल कर सारे, ना बाट भिड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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हक को समझो मजदूर किसानोँ, आगे बढकर आओ।
युग बदलण का बोझ कमेरो खुशी खुशी अपनाओ॥
मार्क्स, ऐगेल्स ने दिया ज्ञान वह घर घर मेँ ले जाओ।
इंकलाब का झंडा लेकर जंग बीच आ जाओ॥
लूटते आये सदा लूटेरे, ना और समाई होगी।
शोणणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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हर जुल्म दमन के खिलाफ लड़ो, अब मेहनतकस जनता सारी।
ना फौज पूलिस की हमेँ जरुरत, ना कोई हो अधिकारी॥
ना कोई किसी का मालिक होगा, न कण का कोई भिखारी।
साझे की सारी सम्पति होगी मेहनतकस हमारी॥
अब साम्यवाद की गूँज सुनेगी, ना किसी मालिक की बड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
¤ प्यारेलाल भाम्बू - 23 मार्च 1980 ¤
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जागृति की लहर चलेगी, वर्ग लड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा अजब जड़ाई होगी॥
बने बनाये कानून लूट के, हमको यह स्वीकार नहीँ।
पूँजी के ढंग ढली हुयी, यह जनता की सरकार नहीँ॥
यहाँ खून पसीने की करेँ दलाली, चलना यह बाजार नहीँ।
गुर संगठन का सीख गये, अब मेहनतकस लाचार नहीँ॥
एक एक हक पर अड़ ज्यांगे, अब घणी कड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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समाज व्यवस्था कैसी होगी, आओ आज सुनायेँ।
दो वर्गोँ मेँ दुनिया बंट रही, वर्ग भेद समझायेँ॥
मेहनतकस की राजसत्ता ला पूँजीवाद हटायेँ।
लूट नाम न रहे जगत मेँ, नक्शा नया बनायेँ॥
हर काम सम्भालेँगे मिलजुल कर सारे, ना बाट भिड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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हक को समझो मजदूर किसानोँ, आगे बढकर आओ।
युग बदलण का बोझ कमेरो खुशी खुशी अपनाओ॥
मार्क्स, ऐगेल्स ने दिया ज्ञान वह घर घर मेँ ले जाओ।
इंकलाब का झंडा लेकर जंग बीच आ जाओ॥
लूटते आये सदा लूटेरे, ना और समाई होगी।
शोणणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
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हर जुल्म दमन के खिलाफ लड़ो, अब मेहनतकस जनता सारी।
ना फौज पूलिस की हमेँ जरुरत, ना कोई हो अधिकारी॥
ना कोई किसी का मालिक होगा, न कण का कोई भिखारी।
साझे की सारी सम्पति होगी मेहनतकस हमारी॥
अब साम्यवाद की गूँज सुनेगी, ना किसी मालिक की बड़ाई होगी।
शोषणमुक्त समाज बनेगा, अजब जड़ाई होगी॥
¤ प्यारेलाल भाम्बू - 23 मार्च 1980 ¤
