॰॰॰- शहीदे-आजम भगतसिँह की याद मेँ-॰॰॰
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बाल सूर्य की प्रथम रश्मि,
मुसकायी मंदिम मंदिम।
उषा-काल के आँचल मेँ,
आसमान के विकल विरल मेँ।
मानवता का मन भावन।
गूँज उठा सहगान।
हो मुदित प्रकृति ने किया नव जीवन आव्हान।
इतिहास मेँ बेजोड़ है।
नव भारत का मोड़ है।
सन उन्नीस सौ सात का उर्मिल प्रभात।
लायलपुर पंजाब मेँ हुये भगतसिँह अवदात।
बंगा मेँ रहता था, सरदार किशनसिँह परिवार।
भगतसिँह जन्मे वहाँ अट्ठाईस सितम्बर शनिवार।
मेहनतकस के मान को सीँचा जिसने खून से।
फाँसी का फंदा हिला था इंकलाब की धुन से।
शोषण की भट्टी मेँ संकटग्रस्त हो सर्वहारा।
साम्राज्यवादी खेमा सारा,जब जुल्म की आँधी लाये।
शोषक सत्ता के शैतान जब कहर पीड़ित पर ढायेँ।
लोकतन्त्र का पहन मुखौटा जब पूँजीवाद छा जाता है।
इंकलाब की ले हूँकार तब भगतसिँह आ जाता है।
कफन बाँध निज नौजवान, जब जब ललकारा है।
तानाशाही ताकत का मनोबल सदा चीखा चित्कारा है।
क्रांतिदूत भगतसिँह भूला कभी न जायेगा।
क्रांति पथ का हर पथिक उन्हेँ श्रद्धा सुमन चढायेगा।
........ प्यारेलाल भाम्बू . ...
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बाल सूर्य की प्रथम रश्मि,
मुसकायी मंदिम मंदिम।
उषा-काल के आँचल मेँ,
आसमान के विकल विरल मेँ।
मानवता का मन भावन।
गूँज उठा सहगान।
हो मुदित प्रकृति ने किया नव जीवन आव्हान।
इतिहास मेँ बेजोड़ है।
नव भारत का मोड़ है।
सन उन्नीस सौ सात का उर्मिल प्रभात।
लायलपुर पंजाब मेँ हुये भगतसिँह अवदात।
बंगा मेँ रहता था, सरदार किशनसिँह परिवार।
भगतसिँह जन्मे वहाँ अट्ठाईस सितम्बर शनिवार।
मेहनतकस के मान को सीँचा जिसने खून से।
फाँसी का फंदा हिला था इंकलाब की धुन से।
शोषण की भट्टी मेँ संकटग्रस्त हो सर्वहारा।
साम्राज्यवादी खेमा सारा,जब जुल्म की आँधी लाये।
शोषक सत्ता के शैतान जब कहर पीड़ित पर ढायेँ।
लोकतन्त्र का पहन मुखौटा जब पूँजीवाद छा जाता है।
इंकलाब की ले हूँकार तब भगतसिँह आ जाता है।
कफन बाँध निज नौजवान, जब जब ललकारा है।
तानाशाही ताकत का मनोबल सदा चीखा चित्कारा है।
क्रांतिदूत भगतसिँह भूला कभी न जायेगा।
क्रांति पथ का हर पथिक उन्हेँ श्रद्धा सुमन चढायेगा।
........ प्यारेलाल भाम्बू . ...


















