Monday, September 17, 2018

रेखा की लंबाई को...

रेखा की लम्बाई को और कितना घटाओगे।
कितने बिँदु, कितने किरण पूँज, इन बिँदुमय रेखाओँ मेँ मिलाओगे॥
त्रिभुज, चतुर्भुज, बहुभुज, सम, ऋजु और न्युन,
ना जाने कितने कोण और भुजायेँ बनाओगे।
कितने लम्ब और स्पर्श रेखाओँ से,
इस वृत को विवृत दिखाओगे।
द्विआयामी, त्रिआयामी, बहुआयामी,
कितने त्रिविमीय चित्र सजाओगे॥
रेखा चित्र, माप चित्र, मान चित्र से कब तक मन बहलाओगे।
रेखायेँ तिलमिलाने लगी हैँ,
चित्र विद्रुपता, कुँठा और क्रुरता झलकाने लगे हैँ,
रंगोँ के चटकीले मेल से कब तक लुभाओगे।
कब तक अंग सौष्ठव से सहज प्रवृतियोँ को उकसाओगे॥
कमप्युटर और एनिमेशन की कला से,
इन ठूँठ और बेजान सी, जीवित गठरियोँ की, गड्ढोँ मेँ धँसी,
बेपनीली आँखोँ मेँ कब तक सपने जगाओगे।
जातीय संस्कृति और राष्ट्रीयता की सीमा रेखाओँ मेँ,
भूख से कुलबुलाते पेट को,
कब तक गौरव और गरीमा के पाठ पढाओगे॥
मल्टी नेशनल को और कितना मल्टी प्रोफेसनल बनाओगे।
धर्म, जाति, कुल, वंश परम्परा, भाषा भेद और रंग भेद से,
कितने और नये बाजार सजाओगे॥
प्रतिद्वन्द और प्रतियोगिता के नाम पर,
कितने और नये विज्ञापन दिखाओगे।
पूर्व की लाली को देखो, नया सूरज निकलने वाला है।
- प्यारेलाल भाम्बू-

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