Wednesday, September 26, 2018

गलाउकस

गलाउकस, इडा माउंट की घाटियोँ मेँ,
बकरियोँ के झुंड को हांकते हुये,
बाँसुरी की मधुर तान सुनाकर,
तुमने ही तो इलियाड के ऐकिलस को,
प्रेयसी के छीने जाने का दर्द याद दिलाया था।
 एक अँधे कवि की आँख बनकर,
ओडेसी के ओडेसियस को,
दस साल तक,
समुन्द्र मेँ भटकाया था॥
 कल्पित देव पुत्रोँ को,
भेड़ बकरियोँ की तरह,
दासोँ और स्त्रियोँ को सताते हुये इलियाड मेँ दिखाया था।
गलाउकस,
बाहुबल के बल से,
विश्व सुंदरी का खिताब दे,
बलात हेलन को,
 उपभोग का उपादान समझ,
वह राजकुमार पेरिस,
 ट्राय के अभेद्य दुर्ग मेँ घसीट लाया था॥

गलाउकस,
अन्याय के विरूद्ध,
सम्मान से लड़ते हुये,
मर जाने का मन्त्र,
ऐकिलिस के मित्र को,
शायद,
तुम्हारे हठी बकरे ने ही सिखाया था।
शायद, स्पार्टाकस को,
 विद्रोह का पाठ,
 जलते हुये ट्राय ने ही पढाया था॥

गलाउकस,
फिर दो बाँसुरी को नया सुर,
असंख्य जुल्मोँ के,
घृणित ट्राय जलाने को,
फिर से लेकर आओ,
 नये गीतोँ का,
कोई निर्भय रचयिता,
गलाउकस,
तुमने ही तो  अंधे होमर को,
आदि कवि बनाया था॥

॰ चित्र गुगल से साभार -
॰ प्यारेलाल भाम्बू ॰

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